जनता दरबार में महिला और मुख्यमंत्री दोनों ने खोया आपा ।

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देहरादुन : मुख्यमंत्री आवास में लगे जनता दरबार में एक शिक्षिका  महिला ने कुछ ऐसा कर दिया कि जनता दरबार में हंगामा मच गया। शिक्षिका ने  अपने ट्रांसफर की मांग को लेकर शोर किया, किन्तु मुख्यमंत्री ने भी कुछ ऐसा कर दिया की सब लोग हैरान हो गए।

शिक्षिका महिला 20 सालों से उत्तरकाशी के प्राइमरी स्कूल( Prathmik vidhyala Jest vadi) में तैनात है और लंबे समय से अपने ट्रांसफर की मांग कर रही है। गुरुवार को गढ़ी कैंट स्थित सीएम आवास में लगे जनता दरबार(Janta Darbaar)  में 150 से ज्यादा फरियादी मौजूद थे। जैसे ही महिला ने अपनी बात मुख्यमंत्री(Trivendra Singh Rawat) के सामने रखनी चाही , मुख्यमंत्री ने महिला को ससपेंड करने की धमकी दे डाली, इससे महिला को  गुस्सा आ गया और महिला ने  हंगामा करना  शुरू कर दिया , मीडिया तथा मौजूद लोगो ने इस घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

trivendra singh rawat wife teacher RTI
trivendra singh rawat wife teacher RTI

खुद मुख्यमंत्री की पत्नी शिक्षिका हैं और शुरु से ही सुगम में ही तैनात हैं |

यह पहली घटना नहीं है मुख्यमंत्री पर आरोप लगा कर पहले भी हल्द्वानी का एक व्यक्ति  जनता दरबार में  जहर खा चूका है !

 

 

 

 

 

 

 

निलंबन के ऑर्डर
निलंबन के ऑर्डर

बता दें की जनता दरबार में जैसे ही मुख्यमंत्री के सामने पहुंचकर जैसे ही महिला ने ऊँची आवाज में अपनी बात रखनी शुरु की  मुख्यमंत्री रावत को यह बात सही नहीं लगी और उन्होंने  तुरंत महिला को शांत रहने के लिए कहा और ऐसा न करने कर ससपेंड करने का आदेश दे दिए और साथ ही महिला को जेल में बंद करने को भी कहा इससे  वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस प्रशासन इससे पहले कुछ समझ पाते की महिला ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को “चोर उचक्का ” तक बोल दिया और खूब खरी-खोटी सुना दी। तुरंत महिला पुलिस कर्मियों ने शिक्षिका महिला पर काबू पाया और खिंचते हुए जनता दरबार से बाहर ले गईं।

हंगामे से गुस्साएं मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को महिला के निलंबन के ऑर्डर जारी करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

 

 

सोशल मीडिया पर इस तरह की  प्रतिक्रियां देखने को मिली – 

पूरा घटनाक्रम ऐसे शुरू होता है –  

  1. 28 जून को हुए जनता दरबार में माइक उत्तरकाशी में 20 से ज़्यादा सालों से टीचर उत्तरा पंत बहुगुणा के हाथ में आता है.
  2. वो कहना शुरू करती हैं, ”मेरी समस्या ये है कि मेरी पति की मौत हो चुकी है. मेरे बच्चों को कोई देखने वाला नहीं है. घर पर मैं अकेली हूं, अपने बच्चों का सहारा. मैं अपने बच्चों को अनाथ नहीं छोड़ सकती और नौकरी भी नहीं छोड़ सकती. आपको मेरे साथ न्याय करना होगा.
  3. न्याय की इस फरियाद को सुनकर रावत उत्तरा से सवाल पूछते हैं, ”जब नौकरी की थी तो क्या लिखकर दिया था?
  4. उत्तरा जवाब देती हैं, ‘लिखकर दिया था सर. ये नहीं बोला था कि मैं वनवास भोगूंगी ज़िंदगीभर. ये आपका है ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ.’ और ये नहीं कि वनवास के लिए भेज रहे हैं हमको ससुराल.
  5. त्रिवेंद्र उत्तरा को टोककर कहते हैं, ”अध्यापिका हो. ठीक से बोलो ज़रा. नौकरी करती हो न. ज़रा सभ्यता सीखो. मैं सस्पेंड कर दूंगा अभी. अभी सस्पेंड हो जाओगी. इसको सस्पेंड कर दो अभी. सस्पेंड करो आज ही. ले जाओ इसको उठाकर बाहर. बंद करो इसको. जाओ इसको ले जाओ. इसको कस्टडी में लो.
  6. त्रिवेंद्र के पुलिस अधिकारियों को आदेश देने के दौरान उत्तरा कहती हैं, ”मैं अध्यापिका हूं तो अध्यापिका के क्या गुण होते हैं?… आप मुझे क्या सस्पेंड करोगे. मैं खुद घर पर बैठी हूं. निशंक जी ने भी यही…. सुनिए हर कोई नेता होता है. हमारी भी भावनाएँ होती हैं… चोर उचक्के कहीं के. भक्क.
  7. इस पूरे वाक़ये के बाद त्रिवेंद्र के आदेशानुसार पुलिस वाले उत्तरा को बाहर लाते हैं. सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो गया है.

वीडियो जनता दरबार –

 

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