केरल की भीषण बाढ़ में चौंकाने वाले कुछ तथ्य

Epidemic may hit kerala after flood

इस वर्ष की मानसूनी बारिश से भगवान के घर कहे जाने वाले केरल में भीषण बाढ़ का प्रकोप देखने को मिल रहा है। 9 अगस्त से अब तक लगभग 324 लोगों की मौत हो चुकी है। ढाई लाख से भी अधिक लोग घर से बेघर हो चुके हैं।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने भी यहां का हवाई सर्वेक्षण कर यहां के भयावह होते हालातों का जायजा लेने के बाद 500 करोड़ रूपए की राहत धनराशि, केंद्र की ओर से दिए जाने की बात कही है। वर्तमान परिस्तिथि में राज्‍य हो या केंद्र, दोनों सरकारों का जोर यहां पर मदद पहुंचाने का है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी 5 करोड़ रूपए की सहायता राशि एवं एक माह का वेतन देने की बात कही है।  अन्‍य राज्‍य की सरकारों ने भी मदद के लिए अपने द्वार खोले हैं। गौरबतल है कि केरल में इससे पहले सन 1924 में भी भीषण बाढ़ आई थी जिसमें उस समय एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर वर्ष 2018 में इतनी भीषण बाढ़ की वजह क्‍या है। हम आपके सामने कुछ तथ्यों को उजागर करना जो किसी नयी दिशा की ओर इशारा करते हैं

  • इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन में निर्माण
  • पहले से कहीं अधिक बारिश 
  • चैकडैम भी बने बाढ़ की वजह 
  • घट गया है केरल का वन और कृषि क्षेत्र 
  • नियमो की सरासर अनदेखी 
  • क्या हो सकते हैं उपाय  
इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन में निर्माण
बाढ़ के कारण हुई भीषण तबाही के मुख्य कारणों में नियमों को ताक पर रख इको सेंसिटिव जॉन में हुए अवैध निर्माण को वरीयता पर रखा जा सकता है। सरकार वोट बैंक के चक्कर में कई नियमों की अनदेखी पूर्व में कर चुकी है। जिसका खामियाजा जनधन की हानि से भुगतना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वे स्थान मुख्य हैं जिनमे अवैध निर्माण किया गया है।

पहले से कहीं अधिक बारिश 

इस बार यहां पिछले वर्षो की अपेक्षा अधिक बारिश हुई है। जिससे बनाये गए बांधों में भी क्षमता से अधिक जल होने से बांधों से जलनिकासी की गयी है। और नदी के किनारे रह रहे लोगों को ज्यादा नुक्सान से दो चार होना पड़ा है।

चैकडैम भी बने बाढ़ की वजह 

पर्यावरणविद चेक डैमों को भी इसकी वजह मानते हैं,

  • केरल सरकार के पास आज भी इस बात की जानकारी नहीं है कि राज्‍य में कितने चेकडैम मौजूद हैं।
  • इस बार यहां पर जलवायु परिवर्तन के दौर में बारिश करीब 300 फीसद अधिक हुई है।
  • जहां तक कोच्चि एयरपोर्ट के भी जलमग्‍न होने की बात है तो यह पेरियार नदी की ट्रिब्‍यूटरी पर बना है।
  • इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन में निर्माण करने की इजाजत नहीं होती है।
  • अवैध निर्माण की वजह से ही पानी के निकलने के मार्ग लगातार बाधित होते चले गए, जिसकी वजह बाढ़ आई और तबाही हुई है।
  • राज्‍य में भूस्‍खलन की वजह से काफी तबाही देखने को मिली है। लेकिन यदि उन क्षेत्रों पर नजर डालेंगे जहां भूस्‍खलन ज्‍यादा हुआ है तो पता चलता है कि यह वही जगह हैं जहां पर निर्माण की इजाजत न होते हुए भी वहां चेकडैम बनाए गए या फिर इमारतें खड़ी की गईं।

घट गया है केरल का वन और कृषि क्षेत्र 

जहां तक केरल की भौगोलिक स्थिति का सवाल है तो आपको बता दें कि केरल से 41 नदियां निकलती हैं। केरल में हो रहे बदलाव को इस तरह से भी देखा जा सकता है कि कृषि के विकास के लिए यहां वनों का दोहन दोगुना हो गया है। इसका सीधा असर यहां के वनक्षेत्र पर पड़ा है।

  • आंकड़ों के मुताबिक राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र (3,885,000 हेक्टेयर) के 28 फीसद (1,082,000 हेक्टेयर) पर वनक्षेत्र है।
  • वहीं दूसरी ओर कृषि के लिए राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 54 प्रतिशत भूमि का उपयोग होता है।
  • देश के अन्य भागों की तरह केरल में भी चारागाह के लिए स्थायी क्षेत्र रखा गया है।
  • आंकड़ों से यह बात उजागर होती है कि पिछले कुछ सालों में राज्‍य में खेती का क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है गैर कृषि क्षेत्र बढ़ रहा है।

 

नियमो की सरासर अनदेखी 

पर्यावरणविद मानते हैं कि  देश में इससे निपटने के लिए नियम काफी हैं। लेकिन वोटबैंक की राजनीति के चलते लगातार इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन में भी हो रहे निर्माण को नहीं रोका जाता है। उनका साफ कहना था कि सरकारें नियमों को खुद ताक पर रखती हैं।

  • गाडगिल कमेटी की रिपोर्ट में यह साफतौर पर कहा गया है कि इन क्षेत्रों में निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। यह कमेटी 2010 में बनी थी। लेकिन सरकारें रिपोर्ट के इतर काम करती आई हैं।
  • भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर वर्षा के बादलों को तोड़ने में अहम भूमिका निभानेवाला पश्चिमी घाट मानवीय हस्तक्षेप के कारण सिकुड़ रहा है।
  • इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने इस पर रिपोर्ट देने के लिए गाडगिल पैनल का गठन किया था।

क्या हो सकते हैं उपाय  
हम जिस तरह के क्‍लाइमेट चेंज में रह रहे हैं उसमें इस तरह की बारिश आगे भी आएंगी। चेन्‍नई में पिछली बार हम इस चीज को देख चुके हैं।

  • इनसे बचाव का सीधा सा एक उपाय है कि हम बदलते समय के लिहाज से खुद को कैसे तैयार करें।
  • इसके लिए निर्माण पर रोक लगाई जानी चाहिए।
  • दूसरा राज्‍य और केंद्र सरकार को इसके लिए लॉन्‍गटर्म और शॉर्टटर्म पॉलिसी बनानी चाहिए।

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