मोदी सरकार का बड़ा फैसला, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो के लिए 10 फीसदी आरक्षण

reservation for economic weaker section

मोदी सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों (Economic weaker general category) के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार इसके लिए  मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस संबंध में संवैधानिक संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार इस बाबत मंगलवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 (Constitution Amendment Bill to Provide Reservation to Economic Weaker Section – 2018) लोकसभा में लेकर आएगी। इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में संशोधन किया जाएगा। सवर्णों को दिया जाने वाला आरक्षण मौजूदा 50 फीसदी आरक्षण से अलग होगा।

पात्रता के लिए जरूरी मानक (Eligibility Criteria for Reservation of Economic weaker section (EVS Category))

सूत्रों ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को परिभाषित करने के लिए कई मानक तय किए जाएंगे। जिन परिवारों की आय आठ लाख रूपए सालाना से कम होगी वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दायरे में आएंगे।

  • मूलत यह ओबीसी आरक्षण में लागू क्रीमी लेयर की सीमा है, इसी को आधार बनाया गया है।
  • इसके अलावा जिनकी कृषि योग्य भूमि पांच एकड़ से कम होगी उन्हें इसके दायरे में रखा जाएगा।
  • अन्य मानकों में पात्रता के लिए आवासीय घर [Residential House] एक हजार वर्ग फिट से कम होना चाहिए।
  • अधिसूचित नगरपालिका में सौ गज से कम का प्लॉट होने पर ही आरक्षण का लाभ पा सकेंगे।
  • गैर अधिसूचित नगरपालिका इलाके में आवासीय प्लॉट की सीमा 200 गज रखी गई है।

संवैधानिक संशोधन जरूरी

सूत्रों का कहना है कि आरक्षण 50 फीसदी की सीमा से अलग होगा इसलिए संवैधानिक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई से अधिक बहुमत से विधेयक पारित कराया जाना जरूरी है। संसद के दोनों सदनों मे पारित होने के बाद इस विधेयक पर कम से कम 50 फीसदी राज्यों में विधानसभा की मंजूरी जरूरी है।

गेमचेंजर हो सकता है फैसला

सरकार के सूत्र इस फैसले को सियासी रूप से गेमचेंजर मान रहे हैं। 3 राज्यों में सत्ता से बाहर हुई भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव से पहले इस फैसले को तुरुप का पत्ता माना जा रहा है।

जानें क्या है देश में आरक्षण की व्यवस्था (Current Reservation Scenario)

केन्द्र सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया है और आर्थिक रूप (10 Percent Reservation to upper caste) से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी का आरक्षण मिलेगा।

  • सरकार ये आरक्षण उन सवर्णों को देगी जिनकी सालाना आय आठ लाख रुपये से कम है।
  • इसके लिए संविधान में संशोधन के लिए संसद के चालू सत्र में बिल लाया जाएगा। आपको बता दें कि मौजूदा कानून में 49.5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है।
  • कैबिनेट के सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले से पहले अनुसूचित जाति (SC) को 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति (ST)  को 7.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है।

आपको बता दें कि आरक्षण की शुरुआत आजादी के पहले प्रसिडेंसी और रियासतों में पिछड़े  वर्गों के लिए शुरू हुई थी।

  • 1901 में महाराष्ट्र में कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति साहूजी महाराज ने गरीबी दूर करने के लिए पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की शुरुआत की थी।
  • इसके बाद अंग्रेजों ने 1908 में आरक्षण शुरू किया था।
  • मद्रास प्रेसिडेंसी ने 1921 में 44 फीसदी गैर-ब्राह्मण, 16-16 फीसदी ब्राह्मण, मुसलमान और भारतीय-एंग्लो/ईसाई को और अनुसूचित जातियों को लोगों को 8 फीसदी आरक्षण दिया गया था।
  • इसके बाद 1935 में भारत सरकार अधिनियम के तहत लोगों को सरकारी आरक्षण सुनिश्चित किया था। बाबा साहब अम्बेडकर ने 1942 में सरकारी सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की मांग उठाई थी।

क्या है आरक्षण का उद्देश्य

आरक्षण देने का उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए की गई। जिससे समाज के हर वर्ग को आगे आने का मौका मिले।

यह भी पढ़ें:

 The accidental prime minister – आखिर क्यों विवादों में घिरी प्रधानमंत्री पर बनी यह फिल्म.?

लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने गहलोत को दी राज्य की कमान

पीएम मोदी ने अटलजी के सम्मान में जारी किया सिक्का, कहा- उनका जीवन पीढ़ियों को देगा प्रेरणा

Releated Post