पलायन से उत्तराखंड के टिहरी जिले में 142 प्राइमरी स्कूल बंद, 22 जूनियर हाईस्कूल में भी लगे ताले

rapid increase in school shut due to migration

उत्तराखंड में भले ही सरकार पलायन को रोकने के लिए ऐड़ी चोटी का दम लगा रही हो लेकिन रोजगार और अस्पतालों की बुनियादी जरूरतों के अभाव में उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिले लगातार खाली हो रहे हैं। अगर ऐसी ही कहानी रही तो वह दिन दूर नहीं, जब सरकार बुनियादी सुविधाएं तो देगी, लेकिन लेने वाला कोई रहेगा नहीं। जी हां , यदि बात की जाय शिक्षा की जो कि एक बुनियादी जरुरत है ,तो बड़े ही भयावह आंकड़े सामने आये हैं उत्तराखण्ड के टिहरी जिले में।

सरकारी स्कूलों के बंद होने का सिलसिला निरंतर जारी है। छात्र संख्या कम होने पर जिन प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है, उनका आंकड़ा शतक पार कर गया है और अन्य कई स्कूल भी बंदी की कगार पर हैं। इसके साथ ही 22 जूनियर हाईस्कूल भी बंद हो चुके हैं।

  • टिहरी जिले में प्राथमिक में तो कई विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें छात्रसंख्या शून्य हो गई थी। स्कूलों के बंद होने के कारण विद्यालय भवन वीरान पड़े हैं। जहां सात-आठ साल पहले अच्छी-खासी छात्र संख्या हुआ करती थी, वहां वर्तमान में छात्र संख्या दहाई से कम होने के कारण बंद हो गए और शिक्षा के यह मंदिर सुनसान नजर आ रहे हैं।

सरकार बुनियादी शिक्षा में सुधार की बात करती है और शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कई अभिनव प्रयोग भी किए जा रहे हैं, लेकिन जिस तेजी के साथ स्कूल बंद हो रहे हैं। इससे पलायन की तेजी एवं सरकारी शिक्षा की पोल खुल रही है।

टिहरी जिले में 1474 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 142 विद्यालय छात्र संख्या कम होने पर बंद हो गए। इसके अलावा, तीन सौ से अधिक जूनियर विद्यालय हैं, जिनमें 22 विद्यालय बंद हो चुके हैं।

प्राथमिक के अन्य विद्यालय भी बंदी के कगार पर हैं। दस से कम संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की योजना थी, लेकिन अधिकांश विद्यालय में छात्रसंख्या शून्य हो गई थी। कई अन्य विद्यालय इसी श्रेणी में पहुंचने वाले हैं, यहां भी छात्रसंख्या घट रही है। तमाम प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों का ठहराव नहीं हो रहा है।

  • सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कई योजनाएं संचालित की है। इनमें मुफ्त पुस्तकें, ड्रेस, दोपहर का भोजन आदि शामिल हैं। इसके अलावा अभी कुछ साल पूर्व कुछ विद्यालयों को मॉडल विद्यालय भी बनाया गया था। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और मॉडल स्कूल भी बस नाम के रह गए हैं।

शिक्षकों की कमी, सुविधाओं का अभाव व शिक्षा का स्तर न सुधरना भी इसका एक कारण है। जिन शिक्षा के मंदिरों में चहल-पहल होती थी, वह आज बिना छात्रों के वीरान हो गए हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग होने लगा है।

प्रखंडवार बंद प्राइमरी स्कूलों की संख्या 

  • भिलंगना————-23
  • चंबा——————-11
  • देवप्रयाग————-18
  • जाखणीधार———-21
  • जौनपुर————–12
  • कीर्तिनगर———-13
  • नरेंद्रनगर————6
  • प्रतापनगर———–23
  • थौलधार————–15

प्रखंडवार बंद जूनियर विद्यालय 

  • भिलंगना—————5
  • चंबा——————–1
  • देवप्रयाग—————5
  • जाखणीधार————6
  • कीर्तिनगर————-1
  • प्रतापनगर————-3
  • थौलधार—————-1

छात्रसंख्या बढ़ाने के किए जा रहे प्रयास

जिला शिक्षाधिकारी बेसिक डॉ. सुदर्शन बिष्ट जिन विद्यालयों में छात्र संख्या दस से कम है उन्हें बंद किया गया है। सौ से अधिक ऐसे विद्यालय हैं। वैसे विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने का प्रयास किए जा रहे है। इन विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को अन्यत्र समायोजित किया गया है।

बहरहाल यदि पलायन का क्रम इसी तेजी से चलता रहा तो कुछ शहरी नगरों और कस्बों के अलावा सभी विद्यालयों में छात्रसंख्या घटनी निश्चित है। इस सम्बन्ध में पहले की अपेक्षा और द्रुत गति से कार्य करने की नितांत आवश्यकता है।

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