जौनसार में रौनक भरा एक माह का मरोज़ त्यौहार 9 जनवरी से प्रारम्भ

देहरादून: समूचा जौनसार-बावर बुधवार से प्रारंभ होने वाले  मरोज व माघ पर्व के तैयारी में डूब गया है । यह त्यौहार इस वर्ष 9 जनवरी से प्रारंभ होने जा रहा है। परंपरानुसार मरोज त्योहार पर बकरे काटने के बाद घर-घर में दावतों का दौर शुरू हो जाता  है। लोग पर्व के शुरू होते ही एक दूसरे की खूब मेहमाननवाजी करते हैं । वहीं इस पर्व में सयाणो के या पंचायती आंगन में हारुल व लोक गीतों पर जमकर तांदी नृत्य किया जाता है। 

“माना जाता है कि इस त्यौहार की शुरुआत के पीछे इस इलाके में भरी बर्फवारी के होने के कारण किसानों की कृषि कार्यों की असमर्थता थी। किसान जनवरी के प्रारम्भ में बकरा काटकर देवता को अर्पित करने के बाद इसे पूरे माह भर खाते हैं। बकरियां माघ प्रारम्भ होने से एक दिन पूर्व काटी जाती हैं और सारी सर्दी फिर इस मांस को ही खाया जाता है।

बकरियां अक्सर ढोल बाजों के साथ भैरो देवता के मंदिर में काटी जाती हैं और फिर उन्हें घर ला लिया जाता है। यहाँ पर बांटा की भी प्रथा है जिसमे बकरी के कुछ भाग को विवाहित पुत्रियों तक भेजा जाता है। “

“This strange tradition of Uttarakhand was also believed to have started in the period when no cultivation was possible in winters due to heavy snowfall in the region. The farmers on the advent of the chilly month of January would slaughter goats before the deity and feast on it. The goats were slaughtered one day before the advent of the Magh month, and given winter the flesh remained good for the entire month.

The goats are sacrificed in front of the Bhairon Devta temple amidst sounds of drumbeats. Once slaughtered, the goats are taken home and the meat is cut into pieces, which is locally called ‘banta’. Then it is wrapped in papers to be sent to the married daughters.”

  • अनूठी संस्कृति के लिए देशभर में विख्यात जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर में हर साल मनाए जाने वाला माघ पर्व व मरोज त्योहार बुधवार को बकरे काटने की परंपरागत रस्म के साथ शुरू हो रहा है। महीनेभर चलने वाले इस त्योहार पर हर गांव में घर-घर पर एक दूसरे को दावत देने दौर शुरू हो गया है। मेहमाननवाजी को मशहूर समूचा जौनसार-बावर इन दिनों माघ पर्व व मरोज त्योहार का जश्न मनाया जाता रहा है। 
maroj festival jaunsar uttarakhand
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क्षेत्र में हजारों की संख्या में मरोज के बकरे काटने के बाद लोगों ने गांवों के पंचायती आंगन में ढोल-दमाऊ की थाप पर हारुल व लोक गीतों पर पारंपरिक तांदी-नृत्य किया करते हैं। माघ पर्व के जश्न में बूढ़े क्या जवान, महिलाएं व पुरुषों ने पंचायती आंगन में सामूहिक नृत्य कर समा बांध देते हैं। माघ पर्व पर दावतों का दौर शुरू होने से ग्रामीण  एक दूसरे को अपने-अपने घर पर दावत का न्योता देकर बुलाया करते हैं और जमकर खातिरदारी करते हैं।

बता दें कि जौनसार-बावर में मरोज के बकरे कटने के बाद पूरे महीने माघ पर्व जश्न मनाने की परंपरा है। सदियों से चली आ रही ये परंपरा क्षेत्र में आज तक कायम है।जौनसार बावर के प्रमुख त्योहार माघ मरोज की धूम इन दिनों क्षेत्र के 359 राजस्व गांव व 200 मजरों में बसे करीब 16 हजार परिवारों में देखी जा रही है। हर गांव में माघ पर्व पर जश्न की तैयारी है। बाहर नौकरी व व्यवसाय करने वाले लोग भी पैतृक गांव आकर पर्व का आनंद उठाते  हैं। सगे संबंधी दावतों में शामिल होकर ख़ुशी का इज़हार करते हैं। इससे हर गांव में रौनक का माहौल बना हुआ है। 

पंचायती आंगन में पुरुष  लागो तौसों दो तरो.., मईपूरिया ले कुणब.., मिनके बामोटे लाले..गीतों पर खूब झूमते है, महिलाओं में  झैंता, रासौ व बिजूरी लोकनृत्यों से समा बांधा जाता रहा है । हर परिवार में एक दूसरे को बुलाकर दावतों का दौर चलता है । कई घरों में गांव के लोगों ने गायण लगाकर नाटियां ठुडू बैणी, दूनिया, सुपनी जैसे पुराने गीत गाए जाते हैं। 

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