चन्द्र ग्रहण हो सकता है भीषण प्रलय का कारण

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आज रात 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण होगा. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण पृथ्वी पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. इस वजह से चंद्रग्रहण केवल चंद्रमा के पृथ्वी की छाया में आकर कुछ देर के लिए लोप हो जाने वाली घटना मात्र नहीं है. सौरमंडल और ब्रह्मांड के दृष्टिकोण में यह अति महत्वपूर्ण घटना है.

त्रिग्रही योग:

इस बार चंद्रग्रहण के वक्‍त मंगल और केतु के बीच त्रिग्रही योग बन रहा है. केतु और चंद्रमा एक साथ मकर राशि में हैं, इसलि‍ए ग्रहण योग बन रहा है.

  • पिछली बार, 31 जनवरी 2018 को चंद्र ग्रहण लगने से कुछ समय पहले दिल्ली और एनसीआर में भूकंप के झटके आए थे. दिल्ली-एनसीआर सहित पाकिस्तान और कजाकिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. ज्योतिषियों की मानें तो चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध भूकंप, बाढ़, चक्रवात, ज्वालामुखी व सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होता है.
  • इस बार सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण लग रहा है.  ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक,  ग्रहण का असर कुछ दिन पहले से ही शुरू हो जाता है. कई ज्योतिषी मौसम में मौजूदा बदलाव की वजह आज के चंद्रग्रहण में देख रहे हैं.
  • देश के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश हो रही है. दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम का हाल कुछ ऐसा ही है. राजस्थान में मूसलाधार बारिश के चलते जोधपुर में बेहद हैरान करने वाले हालात पैदा हो गए हैं. महाराष्ट्र में कोल्हापुर समेत कई इलाके बारिश से बेहाल हैं. चारों तरफ पानी ही पानी है. कई नदियां खतरे के निशान के करीब हैं. उत्तराखंड में भी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं.

दरअसल, ज्योतिष में ग्रहण को अशुभ और हानिकारक प्रभाव वाला माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि चंद्र ग्रहण जल एवं समुद्र को प्रभावित करता है. ऐसा माना जाता है कि ग्रहण आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे-बाढ़, तूफान, भूकंप, महामारी की तरफ इशारा करते हैं. हालांकि कुछ लोग इसे सिर्फ एक अंधविश्वास मानते हैं और इस पर विश्वास नहीं करते हैं.

  • ग्रहण के दौरान सूर्य के आगे बढ़ने की दिशा की सीधी रेखा में पृथ्वी और चंद्रमा के आने पर भूगर्भीय हलचलों की आशंका बढ़ जाती है. कारण, चंद्र-पृथ्वी के पास सूर्य की गति के साथ स्वयं को बनाए रखने के लिए स्वयं को व्यवस्थित करने का यही समय होता है. ऐसी ही एक अत्यंत प्रभावी स्थिति खग्रास चंद्रग्रहण की 27 जुलाई 2018 को बन रही है.
  • इसके आगे पीछे की अमावस्या 13 जुलाई और 11 अगस्त को खंडग्रास सूर्यग्रहण भी होंगे. हालांकि ये दोनों सूर्यग्रहण भी 15-16 फरवरी के सूर्यग्रहण की भांति भारत में मान्य नहीं होंगे, लेकिन पृथ्वी के लिए बड़ी खगोलीय घटनाओं की संभावनाओं से भरे होंगे. 31 जनवरी के खग्रास चंद्रग्रहण से लेकर 15-16 फरवरी को खंडग्रास सूर्य ग्रहण तक ऐसी भौगोलिक घटनाओं की आशंका ज्यादा है.

ज्योतिष में ग्रहणों का बहुत महत्व है क्योंकि उनका सीधा प्रभाव मानव जीवन के तौर पर देखा जाता है. चंद्रमा के पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण उसके गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. इसी कारण पूर्णिमा के दिन समुद्र में सबसे अधिक ज्वार आते हैं और ग्रहण के दिन उनका प्रभाव और अधिक हो जाता है. भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं.

  • ज्योतिष के मुताबिक, चंद्रग्रहण के दुष्प्रभाव से आग और दुर्घटनाएं समाज में परेशानी पैदा कर सकती हैं. लोगों और देशों के बीच मनमुटाव बढ़ सकता है. चंद्र ग्रहण विश्व में अशांति पैदा कर सकता है. चंद्र ग्रहण के चलते भूकंप की भी आशंका बढ़ जाती है.
  • यही भूकंप यदि समुद्र के तल में आते हैं, तो सुनामी में बदल जाते हैं. भूकंप, तूफान, सुनामी आदि में वैसे तो सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल का प्रभाव देखा गया है लेकिन चंद्रमा का प्रभाव विशेष है एवं ग्रहण का प्रभाव और भी विशेष है.

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