अद्भुत खगोलीय घटना जो शायद आपके जीवन में दोबारा न हो- (longest lunar eclipse worldwide)

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27 जुलाई 2018 की तारीख याद रखें क्यूंकि इसी दिन मध्यरात्रि को लगभग 1700 वर्ष बाद सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण ग्रहण लगने जा रहा है। इस अद्भुत खगोलिय घटना में भारत में करीब चार घंटे इस ग्रहण के प्रभाव चन्द्रमा पर होंगे जबकि अन्य देशो में यह 6 घंटे तक हो सकती है जिसे आप अपनी आँखों से देख सकते हैं। इस दिन मंगल भी पृथ्वी के काफी करीब आने वाला है। इस घटना को वैश्विक धरातल में “ब्लड मून” के नाम से जाना जा रहा है। दन्त कथाओं में इसे “वोल्फ मून” के नाम भी जाना जाता है ।

नासा के अनुसार यह ग्रहण गणितीय गणनाओं से संभावित सबसे लम्बे चंद्रग्रहण से केवल 4 मिनट छोटा होगा । खगोलविद् बताते हैं कि ‘ब्लड मून’ इसके रंग की वजह से कहा जाता है। दरअसल, चंद्रग्रहण के समय जब सूरज और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तो सूरज की किरण रुक जाती है। पृथ्वी के वातावरण की वजह से रोशनी मुड़कर चांद पर पड़ती है और इस वजह से यह लाल नजर आता है। जब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है तभी ब्लड मून होता है। भूगोल एवं विज्ञान के शोधार्थियों के लिए यह घटना कई रहस्यों से परदे उठाने में सहायक होगी।

खगोलविदों का दावा है कि अगर मौसम सही रहा तो इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है। इससे आपकी आंखों को कोई क्षति नहीं होगी। चंद्रग्रहण देखने के लिए टेलिस्कोप की जरूरत नहीं होगी। लेकिन अगर टेलिस्कोप से देखेंगे तो आपका चांद और भी खूबसूरत नजकरीब एक 150 साल बाद चन्द्रमा अपने उस रूप में फिर से दिखाई देगा जैसा 27 जुलाई की रात में दिखाई देने वाला है। विभिन्न देशों में इस बार ऐसी घटना को लेकर काफी उत्सुकता है । यह चंद्रग्रहण भारत के अलवा ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अफ्रीका, यूरोपीय देशों व अंर्टाकटिका में भी अासानी से देखा जा सकेगा। इस वर्ष यह दूसरा मौका होगा जब ग्रहण के समय ब्लड मून दिखेगा।

सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण आज से 1700 साल पहले पड़ा था।  भारत में चन्द्रग्रहण का आरंभ रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगा। ग्रहण का मध्यकाल रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा और 28 जुलाई को सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर ग्रहण का समापन होगा।

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