राज्यसभा में पास हुआ सवर्ण आरक्षण बिल

reservation for economic weaker section

Parliament updates | Rajya Sabha passes 124th Constitution Amendment Bill to provide reservation for economic backwards

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राज्य सभा में सवर्ण आरक्षण बिल पास हो गया है।   बिल के पक्ष में 165 वोट और इसके खिलाफ केवल 7 वोट मिले।

राज्यसभा में सवर्ण आरक्षण पर संविधान संशोधन बिल पास। पक्ष में 165 और विरोध में 7 वोट पड़े। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए जाएगा।
  • राज्यसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या 244 है। बिल पारित कराने के लिए दो तिहाई वोट (163) जरूरी हैं। भाजपा 73 समेत राजग के 98 सांसद हैं।
  • लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है संविधान संशोधन बिल। सपा-बसपा-कांग्रेस सहित कई दलों ने बिल का समर्थन किया है। 

इन्हें मिलेगा लाभ

  • ऐसे परिवार, जिसकी सालाना आय आठ लाख या उससे कम होगी।
  •  जिनके पास पांच एकड़ या उससे कम कृषि योग्य भूमि है।
  •  ऐसे परिवार जिनके पास एक हजार वर्ग फीट या उससे कम का फ्लैट है।
  • अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में जिनके पास 109 गज का प्लॉट है।
  •  गैर-अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में 209 या उससे कम का प्लॉट है।
  • जो अभी तक किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते थे

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो के लिए 10 फीसदी आरक्षण

सरकार ने सिन्हा कमीशन की रिपोर्ट को बनाया आधार
सरकार ने गरीब सवर्णो को आरक्षण देने का फैसला सिन्हा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया है। सेवानिवृत्त मेजर जनरल एसआर सिन्हा की अध्यक्षता में 2006 में एक आयोग का गठन किया गया था। इसने 22 जुलाई, 2010 को अपनी रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में सामान्य जातियों के गरीब लोगों को भी सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, इस सिफारिश को तत्कालीन संप्रग सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

अभी किस को कितना आरक्षण
अनुसूचित जाति (एससी) : 15 फीसद
अनुसूचित जनजाति (एसटी) : 7.5 फीसद
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) : 27 फीसद
कुल आरक्षण : 49.5 फीसद

संविधान में करना होगा बदलाव
मोदी सरकार यह आरक्षण आर्थिक आधार पर ला रही है, जिसकी अभी संविधान में व्यवस्था नहीं है। संविधान में जाति के आधार पर आरक्षण की बात कही गई है। ऐसे में सरकार को इसको लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। इसके लिए धारा 15 और 16 में एक-एक क्लॉज जोड़ा जाएगा और सामान्य जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा।

फिलहाल 50 फीसद है सीमा
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसद आरक्षण की सीमा बांध दी है। यह सीमा तब बांधी गई थी, जब सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की बात की गई थी। नया आरक्षण आर्थिक आधार पर होगा। सरकार को आशा है कि इस आधार पर इसे रद करना संभव नहीं होगा।

 

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