बाल शोषण एक अस्पष्ट महामारी

child abuse

Child Sex Abuse,Child abuse untold epidemic,what is child abuse,how to find child abuse,basic child abuse,child abuse guidelines for parents,child abuse awareness,बाल शोषण,बाल यौन शोषण,

 

बाल शोषण कहने में तो बहुत ही गंभीर समस्या है लेकिन क्या हम इस समस्या से भली भांति परिचित हैं|किसी भी बच्चे (लड़की/लड़का/अन्य) के साथ शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक दुर्व्यवहार बाल शोषण कहलाता है| बाल शोषण बच्चों पर बुरा असर डालता है|कभी कभी तो बच्चे ताउम्र इस प्रकार के आघात से बाहर नहीं निकल पाते हैं

हमें कैसे पता लगे कि बाल शोषण क्या है और अपने बच्चों को इससे कैसे बचाया जा सकता है? आपके इन्ही प्रश्नों के उत्तर इस लेख में लिखे गए हैं|

जानिए क्या है बाल शोषण

शारीरिक शोषण

बच्चों से किया गया किसी भी प्रकार का शारीरिक दुर्व्यवहार शारीरिक शोषण के अंतर्गत आता है| बच्चों का बहिस्कार करना, लात मारना, चिकोटी काटना, किसी कमरे में बंद करना, खरोंच करना, कान काटना, कान मरोड़ना, जलाना बच्चों को गर्म मसालों को निगलने के लिए मजबूर करना, असुविधाजनक स्तिथि में रहने के लिए दबाव डालना, इत्यादि शारीरिक शोषण के अंतर्गत आते हैं| बच्चों के साथ किया गया ऐसा खिलवाड़ उनके स्वास्थ्य, अस्तित्व और विकास पर प्रभाव डालता है|

 

यौन शोषण

अपनी कामवासना को पूरा करने के लिए बच्चों के साथ किया गया यौन दुर्व्यवहार यौन शोषण के अंतर्गत आता है| बच्चों पर सारी उम्र, मानसिक स्तर पर, इस प्रकार की घटनाओं का असर पड़ता है| बच्चे के साथ यौन क्रिया करना या अश्लील फिल्मों में काम करने के लिए दबाव डालना इत्यादि यौन दुर्व्यवहार के अंतर्गत आता है| ज्यादातर मामलों में बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार बच्चे के नजदीकी करते हैं| सामान्यतः यौन शोषित बच्चों को उठने बैठने में कठिनाई होती है, इसके अलावा ऐसे बच्चों के जननांगों में दर्द होना, खुजली होना, चोट के निशान आदि प्रतीत होते हैं| यौन शोषण के शिकार बच्चे जिंदगी भर दबे दबे रह सकते हैं, उन्हें सामाजिक मेल मिलाप से दिक्कतें हो सकती हैं और कई बार अवसाद का शिकार भी हो सकते हैं|

भावनात्मक दुर्व्यवहार “या” शोषण

बच्चों को बहुत तेज डांटना, डराना, धमकाना या गली गलोच से बेइज्जत करना भावनात्मक दुर्व्यवहार के अंतर्गत आता है| भावनात्मक दुर्व्यवहार का असर बच्चे के मानसिक स्तर पर पड़ता है जिससे कई बार बच्चे अवसादग्रस्त हो जाते हैं|

कैसे पता करें अपने बच्चे से सम्बंदित शोषण मामले

  • बच्चों का गुमसुम रहना, किसी भी प्रकार की बातों में मन न लगना, दैनिक जीवन में खेलना, कूदना, हँसना, लड़ना बंद हो जाना, घर या बहार जाने जाने से कतराना इत्यादि शोषण से शिकार बच्चों के लक्षण हो सकते हैं|
  • यदि आपको संदेह है तो बच्चे के साथ प्यार से उसके साथ हुई घटना की जानकारी लें|
  • यदि बच्चा आपको उसके साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में बता देता है तो उसे भरोसा दिलाये कि उसके साथ कुछ नहीं होगा
  • बच्चे की बताई बातों का रिकार्ड रखें व नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें|

ऐसी बातें घर की चारदीवारी के अन्दर ही रहनी चाहिए वाली विचारधारा से बहार निकल अपने बच्चों को बाल शोषण के प्रति जागरूक करे व कुछ भी घटना होने पर आपको सूचित करने को कहें|

Releated Post