आज होंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद, शीतकाल के लिए चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से स्थगित

Badrinath Temple

कपाट बंद होने से पहले फूलों से सजा भगवान बदरीविशाल का सिंहद्वार

बदरीविशाल भगवान के कपाट बंद होने के तैयारियाॅ पूरी हो गयीं हैं। मुख्य पुजारी श्री रावल ने माता लक्ष्मी को भगवान संग गृभ गृह मे विराजित किया।
उच्च हिमालयी धाम मे विराजमान कलियुग पापाहारी भगवान श्री हरिनारायण के कपाट शीतकाल के लिए बंद करने की सभी धार्मिक परंपराएं संपादित कर ली गई। बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होते ही शीतकाल के लिए चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से स्थगित हो जाएगी।

पंच पूजाओ के पाॅचवे दिवस दोपहर मे परिक्रमा परिसर मे स्थित माता लक्ष्मी जी का विशेष पूजन हुआ। इसके उपरात अपरान्ह मे श्री बदरीनाथ के मुख्य पुजारी श्री रावल ने स्त्री भेष धारण कर माता लक्ष्मी की श्रीविगृह को लक्ष्मी मंदिर से भगवान नारायण के संग गृभगृह मे विराजित किया। अब शीतकाल मे माता लक्ष्मी भगवान नारायण संग विराजमान रहेगी। इससे पूर्व की अन्य पंरपराओ मे गणेश भगवान की पूजा, आदिकेदारेश्वर की पूजा, खडक/पुस्तक की पूजा व वाचन का बंद किया जाना आदि हुई । पंरपरानुसार पंच पूजा के चैथे दिवस माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का आयोजन किया जाना होता है।

इधर कपाट बंद होने से पूर्व ही भगवान बदरीविशाल के सिंहद्वार को गेंदो के पुष्पो से सजाया गया हैं। शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को दोपहर बाद 3.21 बजे बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही चार धाम यात्रा भी औपचारिक रूप से विराम ले लेगी। धाम में कपाटबंदी के लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। फूलों से सजे मंदिर की आभा देखते ही बन रही है। कपाटबंदी से पूर्व भगवान नारायण का भी फूलों से शृंगार किया जाएगा। इधर, सोमवार को आरती के बाद भगवान नारायण के आभूषण श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के खजाने में रख दिए गए। अब छह माह बाद इन्हें कपाट खुलने पर बाहर निकाला जाएगा।

परंपरा के अनुसार सुबह धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने भगवान बदरी नारायण के प्रतिनिधि के रूप में परिक्रमा परिसर स्थित लक्ष्मी मंदिर में जाकर मां लक्ष्मी को भगवान के साथ गर्भगृह में विराजने का न्यौता दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान का अंतिम आभूषण शृंगार दर्शन भी किया। कपाटबंदी से पूर्व भगवान का श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए फूलों से शृंगार किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर और मंदिर परिसर को भी फूलों से सजाया जा चुका है। सेना के अलावा कई स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से धाम में भंडारों का आयोजन शुरू कर दिया गया है।

कपाटबंदी के कार्यक्रम

  1. ब्रह्ममुहूर्त से भगवान की अभिषेक व महाभिषेक पूजाएं होंगी शुरू
  2. दोपहर 12 बजे लगाया जाएगा बाल भोग व राजभोग
  3. दोपहर एक बजे से शुरू होंगी सायंकालीन पूजाएं
  4. दोपहर बाद तीन बजे भगवान का शृंगार उताकर उन्हें पहनाया जाएगा घृत कंबल
  5. दोपहर बाद 3:21 बजे बंद किए जाएंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

भविष्य बदरी धाम के कपाट भी होंगे बंद

बदरीनाथ धाम के साथ भविष्य बदरी धाम के कपाट भी मंगलवार को दोपहर बाद 3.21 बजे बंद किए जाएंगे। परंपरा के अनुसार जोशीमठ-मलारी हाइवे पर जोशीमठ से लगभग 17 किमी दूर सुभांई गांव स्थित भविष्य बदरी मंदिर के कपाट भी बदरीनाथ धाम के साथ ही खुलते और बंद होते हैं।

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