अब चीन ने भी शुरु किया शरीर को जलाने की प्रथा

मृतु जीवन का सबसे बड़ा सत्य अगर कोई इंसान जीवित होता है तो मरना भी सत्य है| किन्तु मरने के बाद शरीर का क्या करना चाहिये ? इसके लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक चिंतित है, जो देश सबसे ज्यादा चिंतित हैं उनमे चाइना, अमेरिका, स्वीडन, जापान आदि देश प्रमुख है |

किन्तु  इस लिस्ट में एक और देश शामिल है जो की है भारत, भारत में हर साल मरने वालों की तादाद जनसँख्या के अनुपात में लगातार बढती जा  रही है  .

सरकारी आंकड़ो की माने  तो अकेले चीन में ही 2011के आंकड़े के  अनुसार हर साल 9.6 million लोगो  की मृतु  होती है  जो की 2020 तक 20 मिलियन तक बड़ने की सम्भावना है. जिसके चलते चीन के कब्रिस्तानो में जमीन की कमी भी होने लगी है| यहाँ कब्रिस्तान की कीमत 15000$ से लेकर 15000$ तक लगानी  पड़ती है  .

चीन की सरकार ने इसी बात से चिंतित होकर शरीर को जलने का भी प्रचलन शुरू कर दिया है , इसके एवज में  चीन की सरकार १६० डोलोर का बोनस भी दे रही है ,

परन्तु क्या बॉडी को जलना ही समाधान है ? क्यों की भारत में  ही 50मिलियन पेड़ सिर्फ इस लिए काट दी जाते है जिससे  5  लाख टन राख और 8 लाख टन धुवा निकलता है . डेल्ही जेसे शहर में ही बॉडी को दफ़नाने हेतु  जमीन की कीमत 5000 से 15000 रुपया तक देनी पड़ती है .

अन्य उपायों पर ध्यान दे तो  इलेक्ट्रिक क्रेमातोनियम (Electric crematorium) भी एक विकल्प है .जिसमे शरीर को ९८२ डिग्री पर लगभग २ घंटे तक जलाया जाता है , जिसमे काफी मात्र में उर्जा भी  लगती है  ||

स्वीडन के एक साइंटिस्ट ने एक अन्य  विधि के बारे में उपाय दिया है – जिसमे कहा गया है की बॉडी को लिक्विड नाइट्रोजन में डूबा कर रखने के बाद उसको बाद में तब तक vibrate किया जाये जब तक की शरीर कणों के परिवर्तित न हो जाए एवं बाद में राख से हानिकारक तत्वों को अलग कर दिया जाए .

बॉडी को बायोडिग्रेडेबल तरीके से भी नस्त किया जा सकता है .. जिसमे पर्यावरण को जादा नुकसान  नहीं पहुंचेगा .

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