भैला बग्वाल को जीवंत रखने के लिए सराहनीय पहल

Chamba ka bhaila bagwal

विकास की दहलीज पर समाज का एक बड़ा तबका बग्वाल के अपने रीति रिवाजों से अनभिज्ञ है। इसी अनभिज्ञता को दूर करने के लिए उत्तराखंड के टिहरी जिले के चम्बा नगर में एक अनूठी परंपरा का शुभारम्भ किया जा रहा है। यह परंपरा है भैला बग्वाल उत्सव। गांव समाज में पहली बड़ी चाव से होने वाली पहाड़ी दीपावली की यह परंपरा विलुप्त होने की कगार पर है।

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बिलुप्त होती जा रही अपनी लोक संस्कृति/समाजिकता को जिवंत रखने हेतु चम्बा के एक सामाजिक संगठन,संगठन 24 के द्वारा  ईगास बग्वाल (Egash Bagwal) एकादशी के सुभबसर पर भैला बग्वाल उत्सव (Bhaila Bagwal Festival),कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।  यहाँ पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ साथ  मंडाण,भैला,व स्वाला पकोड़ा स्टॉल की व्यवस्था संगठन द्वारा की जा रही है।

chamba bhaila bagwal 2018
chamba bhaila bagwal 2018

इस कार्यक्रम में जाने मने लोक कलाकार किशन महिपाल (Kishan Mahipal), ओम बढ़ाणी (Om Badhani) , घनानन्द घन्ना भाई (Ghananand) रेणु बाला (Renu Bala), रवि गुसाईं (Ravi Guasain) एवं साथी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।पांडव नृत्य एवं नन्दा देवी राजजात नृत्य नाटिका मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहेंगे।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संगठन २४ के अध्यक्ष एवं लोक कलाकार पदम गुसाईं (Padam Gusain) जी प्रतिबद्ध हैं। जिनका कहना है कि “जीवन में हंसी ख़ुशी जरुरी है। आइये हम सब इकठ्ठा होकर हर्षो उलाश के इस पावन पर्ब को नाचते गाते हुए मनाये. मैं पदम् गुसाईं अध्यक्ष संगठन *24 इस भब्य कार्यक्रम में आप सभी बैचारिक व सामाजिक विचारधारा के जनो को सहयोग की अपेक्षा करते हुए सादर आमंत्रित करता हूँ प्रणाम आप सभी को।”

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अब भले ही पहाड़ में कई रीति रिवाजो को उन्मूलन की दृष्टि से देखा जा रहा हो।  लेकिन सामाजिक विचारधारा के व्यक्तियों द्वारा ऐसी पहल नगर का नाम विश्व के धरातल पर सांस्कृतिक छाप छोड़ने का एक उत्कृष्ठ प्रयास है। यदि ऐसे कार्यक्रम चम्बा नगर में लगातार होते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब चम्बा को टिहरी की व्यावसायिक राजधानी के साथ साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी के नाम से जाना जाय।

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