राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद – अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) -10 November केस की सुनवाई

Ayodhya Case Date 10 November 2019 | Supreme Court | Ram Mandir | Ayodhya Case Hearing | Ranjan Gogai | Constitution Bench | Aodhya Latest News | Ayodhya Samachar |

Ayodhya Constitution Bench  –

  • Chief Justice Ranjan Gogoi,
  • Justice SA Bobde
  • Justice NV Ramanna
  • Justice UU Lalit
  • Justice, DC Chandrachud

नई दिल्ली: अयोध्या (Ayodhya ) श्री राम मंदिर(Shri Ram Temple) और बाबरी मस्जिद(Babri Masjid) के विवाद(Dispute) के केस (case) की सुनवाई गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) की नई संविधान पीठ (Constitution Bench) करेगी. अयोध्या मामले (Ayodhya Case) की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ करेगी. सुनवाई करने वाली संविधान पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ हैं.

  • सुनवाई वाली बैंच में चीफ जस्टिस के अलावा वे चार जज हैं जो भविष्य में चीफ जस्टिस बनेंगे. इसमें कोई मुस्लिम जज नहीं है. पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था कि अयोध्या मामले की सुनवाई अब 10 जनवरी को नई बेंच करेगी. इस पीठ का गठन 10 जनवरी से पहले किए जाने की बात कही गई थी. मंगलवार को इस पीठ का गठन कर दिया गया.
  • अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए नवगठित संविधान पीठ अभूतपूर्व बेंच मानी जाएगी. ये चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का अप्रत्याशित कदम है. उनका पांच जजों की संविधान पीठ का प्रशासनिक आदेश तीन जजों के न्यायिक आदेश के विपरीत है जिसमें मामले को पांच जजों को भेजने से इनकार कर दिया गया था.
  • अयोध्या मामले में पांच जजों की संविधान पीठ 10 जनवरी को करेगी सुनवाई, सर्कुलर जारी -अब यह तय हो सकता है कि अयोध्या मामले की सुनवाई किस तारीख से होगी. यह भी तय होगा कि क्या इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी? आम तौर पर संविधान पीठ किसी मुद्दे पर बैठती है तो वह उसी मामले की सुनवाई करती है. ऐसी सुनवाई हफ्ते के मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को होती है.
  • मणिशंकर अय्यर ने पूछा- दशरथ के महल में 10 हजार कमरे थे, भगवान राम कौनसे में पैदा हुए? – खास बात ये है कि 27 सितंबर 2018 को तीन जजों की पीठ ने इस मांग को ठुकरा दिया था कि इस्माइल फारूखी के 1994 के उस जजमेंट पर फिर से विचार करने के लिए उसे संविधान पीठ के पास भेजा जाए जिसमें कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. इसके बाद तीन जजों की पीठ को मामले की सुनवाई करनी थी. इसके बाद अब पांच जजों की संविधान पीठ का गठन किया गया.

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