Amrapali group for playing “dirty game” with the court – SC

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The Supreme Court comes down heavily on the Amrapalli group.

Action of SC –

  • The court has attached accounts and properties of the 41 companies, which were part of the Amrapali group.The Court has taken serious note of diversion of funds by the company.
  • The SC has also freezed bank accounts of all directors of 40 companies of the Amrapali group.
  • The Court has directed attachment of personal property of all the directors and also directed attachment of all bank accounts and movable properties of all 40 companies of Amrapali group.
  • SC hauls up Amrapali group for playing “dirty game” with the court by not complying with its order and dealing the proceedings.
  • The Court says, “Don’t test our patience, as it passes order to attach properties of the company and all directors”.
  • The Bench was led by Justice Arun Mishra and Justice U U Lalit.
  • SC had also summoned Secretary of Ministry of Housing and Urban Affairs and Chairman of NBCC to personally appear before it tomorrow for taking steps to complete Amrapali’s project while the matter is pending before it.

SC has also directed Amarpali group to give names of all Chartered Accountant, who are handling the account of 40 companies of Amrapali group by tomorrow.


पिछली खबरें

आम्रपाली ग्रुप और फ्लैट खरीदारों के बीच चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने बिल्डर ग्रुप की किसी भी संपत्ति की बिक्री या ट्रांसफर पर रोक लगा दी है.

इसके अलावा मामले पर कोर्ट ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से एक हफ्ते की अंदर रिपोर्ट देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि इन सभी को जीरो पीरियड का फायदा दिया जाए या फिर नहीं. इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी.

आपको बता दें कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की तरफ से विष्णु शर्मा ने कहा कि आम्रपाली ने पिछले चार साल में निर्माण रुकने के लिए NGT और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आर्डर का हवाला देते हुए जीरो पीरियड के तहत बकाया चुकाने में राहत की गुहार लगाई थी. इसके अलावा आम्रपाली हार्टबीट प्रोजेक्ट पर भी रिपोर्ट तलब की गई है.

आपको बता दें कि इससे पहले भी शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया था. SC ने पूछा था कि नौ प्रोजेक्ट कबतक पूरे होंगे और कितनी लागत आएगी. और इनमें रकम कौन लगाएगा.

गौरतलब है कि खरीदारों की ओर से कोर्ट में पेश रिपोर्ट में आम्रपाली के 9 प्रोजेक्ट्स को 3 दर्जों में बांटा गया है. इनमें एक वो हैं जिसमें अभी भी कुछ लोग रह रहे हैं जिसमें लिफ्ट, फायर सेफ्टी, पावर बैकअप जैसी सुविधाएं नहीं हैं. इसके अलावा दूसरे में 6 से 9 महीनों में पूरे होने वाले एक प्रोजेक्ट हैं और तीसरे दर्जे में वो हैं जिनमें अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है.

समय पर नहीं मिले खरीदारों को फ्लैट्स तो आम्रपाली बिल्डर्स को होगी जेल: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लेजर पार्क प्रोजेक्ट में 19 टावर पूरे करने के लिए निर्माण शुरू करने और उसे पूरा करने की इजाजत दी. साथ ही कोर्ट ने 1665 फ्लैट जल्द से जल्द तैयार करने को कहा.
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली बिल्डर्स को समय पर खरीदारों को फ्लैट्स नहीं देने पर जेल भेजने की चेतावनी दी है. कोर्ट ने कहा है कि अगर आम्रपाली बिल्डर्स वादे के मुताबिक समय पर प्रोजेक्ट्स पूरा कर खरीदारों को फ्लैट्स नहीं देते तो हम इनको जेल भेज देंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लेजर पार्क प्रोजेक्ट में 19 टावर पूरे करने के लिए निर्माण शुरू करने और उसे पूरा करने की इजाजत दी. साथ ही कोर्ट ने 1665 फ्लैट जल्द से जल्द तैयार करने को कहा.

खरीदारों की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 13 डेवलपर्स से साझेदारी की अनुमति दी. सुनवाई में कोर्ट ने आम्रपाली को 7 मार्च तक इसके लिए अंडरटेकिंग दाखिल करने को कहा. कोर्ट ने कहा कि वो खुद इसकी निगरानी करेगा और 27 मार्च को सुनवाई करेगा.

इसके अलावा बाकी के प्रोजेक्ट्स पर 15 मार्च को सुनवाई होगी. कोर्ट ने कहा कि हम पर ना रेरा का कोई असर होगा और ना ही दिवालियापन कार्रवाई का कोई फर्क पड़ेगा. कोर्ट की कोशिश है कि लोगों को जल्द से जल्द फ्लैट मिल सके.

वहीं, आम्रपाली की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ब्यौरे में कहा गया है कि उसके 10 प्रोजेक्ट के 10,647 फ्लैटों में से 980 फ्लैट 3 से 6 महीने के बीच, 2085 फ्लैट 6 से 9 महीने के बीच, 3130 फ्लैट 9 से 12 महीने के बीच और 4452 फ्लैट 12 से 15 महीने के बीच तैयार होंगे. फ्लैट तैयार होने के बाद खरीदारों को कब्जा दिया जाएगा. पहले फेज में 19 टावरों का काम पूरा करने के लिए 87 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसले आम्रपाली बिल्डर्स के खिलाफ फ्लैट खरीदारों द्वारा दायर याचिकायों पर सुनवाई करते हुए दिए. खरीदारों ने ग्रेटर नोएडा में फ्लैट्स का आवंटन न करने पर आम्रापाली बिल्डर्स के खिलाफ केस दर्ज किया था.

 

आम्रपाली के बायर्स और अथॉरिटी के बीच बैठक फिर बेनतीजा

घर के लिए आम्रपाली के बायर्स लगातार सरकार और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का दरवाजा खटखटा रहे हैं, लेकिन ना तो सरकार इस मुद्दे को लेकर स्थिति स्पष्ट कर रही है और ना ही ऑथिरिटी.

मींटिग का सिलसिला जारी है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है. हालांकि बायर्स भी अपनी कोशिशों को बंद नहीं कर रहे हैं. लिहाजा आम्रपाली के बायर्स ने एक बार फिर ऑथिरिटी का दरवाजा खटखटाया. इस बार भी लंबी मीटिंग का दौर चला, जिसमें ग्रेटर नोएडा ऑथिरिटी के सीइओ देवाशीष पांडा के अलावा एसीओ आनंद मोहन भी मौजूद रहे.

दरअसल, इतना हो हल्ला के बाद भी किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है कि इन बायर्स को घर मिलेगा कि नहीं…और अगर मिलेगा तो कैसे?

1. क्यूरी & ब्राउन करेगी आम्रपाली का ऑडिट

आम्रपाली सेंचूरियन पार्क ऑडिट पर पूछे गए सवाल पर बायर्स को बताया गया कि ग्रेटर नॉएडा अथॉरिटी ने क्यूरी & ब्राउन (Curri & Brown)को शॉर्टलिस्ट कर लिया हैं. क्यूरी & ब्राउन इंग्लैंड की एक नामी मैनेजमेंट कंपनी है, जो रियल एस्टेट इंडस्ट्री में कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रोवाइड करती हैं.

आम्रपाली सेंचूरियन पार्क का ऑडिट भी यही कंपनी करेगी, जिसके लिए MOU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. अब नए बिल्डर सेंचूरियन पार्क के बिल्डर के रूप में यह हस्ताक्षर करेंगे, जिसकी रिपोर्ट ग्रेटर नॉएडा अथॉरिटी को दिसंबर के अंत तक मिलेगी यानी अब आम्रपाली का ऑडिट होगा, लेकिन इससे घर की समस्या कैसे सुलझेगी…ये पता नहीं?

2. आम्रपाली सेंचूरियन पार्क को-डेवलपर की नियुक्ति

प्राधिकरण के अनुसार इस परियोजना को पूर्ण करने के लिए किसी भी को-डेवलपर को नहीं लाया गया है, जब तक कि वह प्राधिकारी की मांग के अनुसार जरुरी दस्तावेज जमा न करे. तदनुसार उसे अंतिम रूप दिया जाएगा. दस्तावेज़ पेश करने की अंतिम तिथि दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक होगी. अगर बिल्डर विनय विशाल सेंचूरियन पार्क का एक अंग बन जाता है, तो भी आवशयक दस्तावेज प्राधिकरण को जमा करवाने होंगे, जो उसने अभी तक नहीं करवाए हैं.

3. आम्रपाली सेंचूरियन पार्क ने रेरा में कराया पंजीकरण

आम्रपाली ने रेरा में पंजीकरण करा लिया है, लेकिन 12 दिसंबर तक आम्रपाली सेंचुरियम पार्क को अपने दस्तावेज लखनऊ में सत्यापित करवाना होगा. अगर ऐसा नहीं होता है, तो खुद-ब-खुद पंजीकरण रद्द हो जायेगा.

4. प्राधिकरण का सुझाव

आम्रपाली मसले की स्थिति जटिल है. लिहाजा अधिकारियों ने सुझाव दिया कि सभी पक्षों के द्वारा दबाव बनाने की आवश्यकता है, जिसमें बिल्डर के विरुद्ध RERA में शिकायत दर्ज करवाना भी शामिल है. यानी किसी भी स्थिति में बायर्स के पास इंतजार के अलावा कोई चारा नहीं है. इसके बावजूद भी क्या घर मिलेगा…ये भी बताने वाला कोई नहीं है.

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