Ambubachi Kamakhya Mela – जहाँ देवी के मासिक धर्म की भी पूजा होती है – असम कामख्या मंदिर अम्बुबाची मेला 2018

Ambubachi kamakhya mela

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सुनने में अजीब लगे लेकिन यह सच है वैसे तो भारत में  देवी देवताओं की मान्यताओं और अपार श्रद्धा भक्ति की मिशाल के रूप में देखा जाता है

और कहा जाता है की यह देवी देवताओं का देश है . लेकिन क्या आपको पता है की कुछ परम्पराए आपको यह सोचने पर विवश कर देंगी की किस तरह इंसान ने देवी देवताओं पर भी अपने नियम कानून लागू करना प्रारम्भ कर दिए है .

क्यों मनाया जाता है यह त्यौहार ? – 

  • हिमालयी राज्य असम में  कामख्या मंदिर में हर वर्ष यह  पर्व  मनाया जाता है.
  • मान्यता में विश्वास करने वाले  श्रद्धालुओं के लिए इतना खास है कि इस पर्व में शामिल होने के लिए वे  विभिन्न कोनों से हजारो  की संख्या में यहाँ पंहुचाते हैं.
  • जी हाँ  कामख्या मंदिर एक मात्र ऐसा मंदिर है जहाँ देवी के मासिक धर्म की भी पूजा होती है.
  • सुनने में अजीब लगेगा लेकिन 3 दिन तक मासिक धर्म की मान्यता के कारण मंदिर को बंद किया जाता है. और 3 दिन के पश्चात देवी को नहलाने के पश्चात पुनः मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है.
  • बड़े बड़े तांत्रिक, अघोरी पंडित सिद्धि प्राप्ति के लिए यहाँ पर आते हैं. लोगो की ऐसी मान्यता है कि यहाँ पवित्र होने के पश्चात् कामख्या मंदिर के श्रद्धालुओं की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है.

कब मनाया जाता है यह पर्व ? 

  • कामख्या मंदिर में हर वर्ष जून माह के मध्य ३ दिनों तक यह पर्व मानाने का प्रचलन  है.
  • 22 जून से प्रारम्भ होकर 25 जून तक रहता है . फिर 22 जून को कामख्या मंदिर के कपाट ३ दिन के लिए बंद कर दिए जाते हैं /जायेंगे और 25 जून को फिर से मंदिर के कपाट खोले जायेंगे. इस अवधि में मंदिर के बाहर यह अम्बुबाची मेला लगा रहेगा

कामाख्या मंदिर खुलने और बंद होने का समय :

  • यह मंदिर कामाख्या मंदिर प्रातःकाल 5:30 पर खुल जाता है, और लगभग 6 बजे  तक लोगो  प्राप्त करते हैं .
  • कामाख्या मंदिर के द्वार रात के 10 बजे तक खुले रहते हैं ,

कामाख्या मंदिर पहुंचना चाहते हो तो आपको बता दे की

  • नजदीकी रेलवे स्टेशन: से कामाख्या जंक्शन, गुवाहाटी जंक्शन
  • नजदीकी हवाई अड्डा: से बोरझार, बरपानी
  • सड़क मार्ग : से गुवाहाटी से कामरूप जिला

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