टिहरी गढ़वाल के लिये आज है ऐतिहासिक दिन

आज का  दिन  गढ़वाल के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। आज के दिन ही जहाँ एक ओर गढ़वाल की एक हस्ती पैदा हुई, तो एक बड़ी हस्ती और व्यक्तित्व का दुनिया से विदा हुआ। आइये जानते हैं इन हस्तियों के बारे में कुछ ख़ास।

श्री सुंदर लाल बहुगुणा (Sundar lal Bahuguna) जी, मरोड़ा गांव, पट्टी जुवा टिहरी, (जन्म 1927) 

sundar lal bahuguna
sundar lal bahuguna

श्री सुंदर लाल बहुगुणा जी कौन नहीं जानता, और कौन देश नहीं जानता। उनके 76 वर्षीय शिष्य आईएएस अफसर रिटायर्ड श्री चंद्र सिंह ने एक दिन 1980 का उत्तर काशी का प्रशंग मुझे सुनाया। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी उत्तरकाशी आईं थीं। रामलीला मैदान में सभा के बाद जब वह सीढ़ियों से उतरने लगी तो सामने खड़े श्री सुंदर लाल बहुगुणा को उन्होंने देखा तो छूटते हुए कहा कि, बहुगुणा जी आपका काम मैंने कर दिया है। चूंकि साथ मे चंद्र भी थे। और भी लोग बहुगुणा के अलावा कोई समझ नहीं पाए। बहुगुणा जी ने उन्हें धन्यवाद दिया। और चल दिये।वह काम था वन अधिनियम देश में लागू करना। जिसके लिये वे कई बार लखनऊ नई दिल्ली गए। और इंदिरा गांधी को तार्किक ढंग से समझाने में कामयाब रहे थे। हालांकि गांधी का अपना फैसला भी रहा होगा।
जैसे वे प्रसिद्ध थीं।लेकिन नीव में बहुगुणा थे। वन अधिनियम से वन बचे। खुली सांस ले सकते हैं। हालांकि इस टाइट अधिनियम से विकास भी प्रभावित हुए थे।लेकिन जब जीवन का सवाल आये। तो आज के दौर में पेड़ ही याद आएंगे।बहुगुणा जी के और कामों के बारे में आप जानते ही होंगे।बहुगुणा जी सादगी पूर्वक जिंदगी जीते हैं। हैप्पी बर्थडे बहुगुणा जी।

श्री देवेन्द्र शास्त्री जी, सेलुर गांव ,पट्टी जुवा, टिहरी गढ़वाल 

Devendra Shastri ji RSS
Devendra Shastri ji RSS

भाजपा में जो लोग पढ़ते लिखते हैं और संघ से आये हैं वे देवेंद्र शास्त्री को जानते हैं। आरएसएस की जिन जिन लोगों ने नीव डाली थीं, उनमें देवेंद्र शास्त्री का हाथ रहा। वे दीन दयाल उपाध्याय के साथ रहे। इसके प्रमाण मिलते हैं। 1942 से 1947 बंटवारे तक सेकुपुरा आज पाकिस्तान में है के आरएसएस के प्रचारक रहे। उस वक्त पंजाबियो पर जो जुल्म हुए, शास्त्री जी ने इंसाफ दिलाया। आज जो भी पंजाबी बीजेपी विचारधारा में है, उसका काफी हद तक शास्त्री जी का 1942 का योगदान जाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी जब देहरादून , गढ़वाल , उत्तराखंड आते थे ,तब दो चार लोग ही थे ,जिनमें शास्त्री जी प्रमुख थे। उनके साथ पग पग चलते थे। शास्त्री जी के देहरादून में सहयोगी होते थे श्री खुशहाल सिंह रणावत जो डाबरी गांव, थौलधार के थे। 1977में तब जनता पार्टी थीं शास्त्रीजी देहरादून के एमएलए भी रहे।मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे। अटल जी विदेश मंत्री। शास्त्री जी 1994 से 1999 तक एमएलसी भी रहे।

श्री देवेंद्र शास्त्री जी अटल जी को बार बार अलग राज्य देने के लिए समझाते थे। लेकिन जब अटल जी ने अलग उत्तराचल बनाया, तब उसके हर्ष को देखने शास्त्री जी आज नहीं हैं। हालांकि, उनके पहले मुख्यमंत्री बनने की चर्चा भी थीं। बाजपेयी जी सहमत थे।
उनका कार्यकाल एमएलसी का खत्म हो गया था।

एक दिन सबको जाना है। अच्छे कार्यो की प्रशंसा होती है। याद किये जाते हैं। जैसे संघ के लिए शास्त्री जी ने कार्य किया। वह अद्भुत कहा गया। उन्होंने सादगी, ईमानदारी से जीवन चलाया। वे डबराल जाती के थे। तमाम शास्त्र के वे ज्ञाता हुए थे। तभी शास्त्री कहलाए। उत्तराखंड में तीसरी बार बीजेपी की सरकार है। उनके नाम का तामझाम नहीं दिखता। हाँ उत्तराखण्ड सचिवालय में एफआरडीसी भवन शास्त्री जी के नाम है। 9 जनवरी 2012 को उनका देहांत हो गया था।आज शास्त्री जी की 7 वीं पुण्य तिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

Source: शीशपाल गुसाईं जी की फेसबुक वाल से

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