8 सितम्बर से नहीं दिखेंगी 108 सेवा?

108 services extension expires

108 services | 108 services contract extension expires in September | Dr T C Pant | GVK EMRI

उतराखंड मे 108 सेवा बन्द होने के कगार पर है। वर्ष 2008 में प्रारम्भ हुई 108 सेवा (108 Services) का जीवीकेऍमआरआई (GVK EMRI) कंपनी के साथ राज्य सरकार का करार मार्च 2018 में ही समाप्त हो गया था। इस करार को मौजूदा सरकार ने 6 माह का एक्सटेंशन दिया था,जो  7 सितम्बर को समाप्त हो रहा है। 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन कर रही कंपनी ने भविष्य में काम करने से इन्कार कर दिया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है।

एक ओर जहां आपातकालीन सेवा 108 के बेड़े को मजबूत बनाने की कवायद चल रही है, वहीं प्रदेश में इसके बंद होने की नौबत आ गई है। आगामी सात सितंबर तक 108 को मिला छह माह का एक्सटेंशन पूरा होने जा रहा है। जिसके बाद संचालक कंपनी जीवीके ईएमआरआइ (GVK EMRI) ने आगे काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उधर, 108 के संचालन को लेकर नए टेंडर भी अभी नहीं हुए हैं। ऐसे में अगले माह 108 के पहिये थम सकते हैं।

प्रदेश में वर्ष 2008 में 108 सेवा का संचालन शुरू किया गया था। उस समय प्रदेश सरकार ने दस साल के लिए जीवीकेईएमआरआइ से करार किया था। इस सेवा से प्रदेशवासियों को खासी सहूलियत मिली। खासतौर से पर्वतीय क्षेत्रों में प्रसव आदि में यह सेवा अहम भूमिका निभाती रही है।

  • वर्तमान में 108 सेवा: 139 एंबुलेंस ,95 खुशियों की सवारी
  • खुशियों की सवारी अस्पतालों से गर्भवतियों को घर छोड़ने का काम करती है।
  • 8 मार्च 2018 को जीवीके ईएमआरआई का सरकार के साथ खत्म हो गया था दस साल का करार।
  • सरकार ने कंपनी को दिया था छह माह का एक्सटेंशन।

बहरहाल, इस बीच कंपनी ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजकर अवगत कराया दिया है कि आगे इस सेवा का संचालन नहीं कर पाएंगे। इसका कारण बार-बार बजट को लेकर हो रही दिक्कत को माना जा रहा है। कंपनी के इस कदम से एक बात तय है कि यदि स्वास्थ्य महानिदेशालय ने इस ओर कदम नहीं उठाए तो इस सेवा का संचालन प्रभावित होना तय है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत का कहना है कि उन्हें जीवीके कंपनी का पत्र मिला है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द नया टेंडर करा दिया जाए।

करीब 850 कर्मचारी होंगे प्रभावित

अगर 108 सेवा का संचालन कर रही जीवीके को दोबारा टेंडर हासिल नहीं होता है तो इस कंपनी के लिए काम कर रहे करीब 850 कर्मचारियों का भविष्य भी अधर में फंस जाएगा।

बजट बड़ा रोड़ा

108 के रखरखाव, ईंधन व संचालन आदि के लिए सालाना 22 करोड़ का बजट तय है। यह रकम कंपनी को त्रैमासिक दी जाती थी। जिसमें जब तब व्यवधान उत्पन्न होता रहा। एक्सटेंशन के दौरान यह रकम मासिक मिलनी थी, पर यह पैसा भी समय से नहीं मिला। जिसमें न केवल ईंधन व गाड़ियों के रखरखाव बल्कि कर्मचारियों को वेतन देने में भी दिक्कत आ रही थी। कंपनी के संचालन से हाथ खींचने के पीछे यही वजह मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि पैसा समय से न मिलने के कारण संचालन प्रभावित हो रहा है और इस वजह से उसकी भी साख खराब हो रही है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत (Dr. T C Pant) के अनुसार अगस्त माह तक का पूर्ण भुगतान हो चुका है।

वर्तमान में 108 वाहनों की जिलावार सूची 

  • अल्मोड़ा-13
  • नैनीताल-14
  • पिथौरागढ़-9
  • यूएसनगर-9
  • चंपावत-5
  • बागेश्वर-6
  • पौड़ी-17
  • देहरादून-18
  • चमोली-11
  • टिहरी-14
  • उत्तरकाशी-9
  • रुद्रप्रयाग-5
  • हरिद्वार – 9

यह भी माना जा रहा है कि दस वर्ष पूर्ण कर चुके 108 वाहन कंपनी के लिए सफ़ेद हाथी साबित हो रहे हैं। जिनका रखरखाव काफी मंहगा साबित हो रहा है। अब 108 सेवा में यदि विस्तार किया जाता है तो नए वाहनों से पुराने वाहनों को बदलने की भी प्रक्रिया करनी होगी। अब प्रदेश सरकार और कंपनी के बीच की तकरार का सामना यदि जनता को उठाना पड़ा तो संभव है कि आने वाले चुनावों में इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिले। और यदि कंपनी से करार नहीं होता है तो बहुत संभव है कि 8 सितम्बर के बाद उत्तराखंड में 108 सेवा वाहन नहीं दिखें।

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